दोहे

मिट्टी का छोटा दिया लड़ता सारी रात ।

            भगवन का हे दिया काहे को डर जात ।।

 

             रखकर दे दिया कोयल को वनवास ।

             घर में अब हो रहा रिश्तों का उपहास ।।

 

नहीं शर्म नहि हया है नहि नैनों में नीर ।

तुच्छ लाभ के वास्ते गिरवीं रखा जमीर ।।

         

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