नजरिया भी बदले

बदला जबसे नजरिया, टूट गया विश्वास ।
नैतिकता का लोपहो, लगा जाते कयास ।।

सत्ता रखे गठजोड़ पे , रहते गद्दार साथ ।
जनता से मुखमोड के , नजरिया बिना नाथ ।।
नवीन

         

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