नजरिया

जिसका जैसा नजरिया, लगते वैसे नाथ ।
कल्याण सोचे विश्व के,बन गये विश्वनाथ ।।

बदले कबसे नजरिया, सर्व धर्म सदभाव ।
धर्म रक्षक बन करते ,रक्त दूषित बहाव ।।

रक्त दूषित बहाव , धर्मांध ज्ञान बांटते ।
मार पीट कुप्रभाव,अल्प ज्ञानी ही मानते ।।

तमोगुण न्यून भाव , शांत भाव से साथले ।
समरसता का भाव ,नजरिया सबके बदले ।
*नवीन कुमार तिवारी*

         

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