नानक जी पर दोहे

रखों उस मालिक डोरी, कारज आप होंगे
मन से जब सिमरन करो, शुद्नचित जाप होंगे|१
कागदि कलम हैं लिखन को ,मन बने लिखणहारू
सबही बैर भुला दुर्जन , मन करनि वीचारू।२
किरत करतें नाम जपों, सच ही निरंजनु होइ
उस सज्जन को जग भला ,जाणै मनि जो कोइ।३
पवणु गुरू पाणी पिता हि माता धरति महतु
दिवसु राति दुइ दाई हि ,माया खेलै जगतु।४
मेरो सभी कहत रहें, हित में वाच्यों चीत
अंतकाल संगी कोय , यह अचरज की रीत|५
मनुवा बुरा नहिं समुझत, सिख दै हारों नीत
नानक भव-जल-पार हो, जो गावै प्रभु गीत|६
दीन दयाल दरस होय , जन खुशी घर आई
नानक जगत सभ मिथिआ, ज्यों सुपना रैनाई|७
रेखा मोहन २4/११/१८

         

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