न्याय या,,

मांग रहे इंसाफ वे, देते बीसो साल ।
अस्थि पंजर ढीले करे ,निकाले रखो खाल।।

ढूंढो ढूंढो हिरन सभी, किसका बनता काल ।
मौत मौत खेले गया , मर रहा अब अकाल ।
नवीन कुमार तिवारी

         

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