डाली झुकी वो फल की

डाली झुकी वो फल की, रखती नम्रता भाव ।
खाते पत्थर सोच चली,फल देना स्वाभाव।।

खट्टे मीठे फल मिलते, रखे रसीले आम ।
आम खाकर बीज रखे, देते गुठली दाम ।।

बेर देख लार टपके,खटास रहते स्वाद ।
पत्थर फेंक बेर गिरते, शूल करे प्रतिवाद ।

नवीन कुमार तिवारी,,

         

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