मनबोध

*मनबोध*

वो सियासत डूब चुकी, बनके जनता राज ।
चाटुकार धर्म बदले, कहते तीरंदाज ।।

अंतर्मन की क्या दशा, उल्लास रहे पास ।
विकल हृदय में मधुरता, पहचान चले खास ।।

नमन पर नमन हम किये, वन्दन करते आज।
मिलन किशन बन कर लिये,सपने की ये राज ।।

कथनी पर करनी भले, कर ले अब तो काज ।
सुकर्म कर अनाम बने, मोहक जीवन राज ।।
*नवीन कुमार तिवारी,*

         

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