मनुज के दोहे

1
देख अजब फैशन यहाँ, मनुज हुए अब दंग|
पोशाकें महँगी मगर, खुले हुए सब अंग||
2
ऊँची भरी उड़ान पर, छू न सका आकाश|
ओंधे मुँह वो गिर पड़ा, लोग कहें शाबाश|
3
कितना भी बेशक बना, सुन्दर और अनूप|
वह घर तो बस कूप है, बिन पंछी बिन धूप|
4
अधरों पर मुस्कान हो, आँखों में हो आब|
छुपकर जो तकदीर से, देखोगे तुम ख्वाब|
5
झुककर तू गौहर उठा, कर सबसे आदाब|
तेरे हाथ न लग सके, मनुज कभी माहताब |
6
नकली डिग्री को लिये, नाप रहे हैं ताप|
इनसे तो यारो भले, अपने झोलाछाप|

         

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