रोटी चोर,,

रस मधुरस में ,,,,,,दोहे पर प्रयास ,,,,,,
::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::
रोटी,,
आया मौसम भूख का ,होगा अभी चुनाव ।
रोटी चावल बेचते , बहे दारु बेभाव ।।

देत प्रलोभन हो रहे ,अनपढ़ नेता पास ।
लूट मार पे मौन क्यों , चाटुकार का दास ।।

नेता करते दीखते, केवल तोंद विकास ।
किंतु लोकहित के लिये, क्या क्या किये प्रयास।।

वोट बेच वह रो रहा, होकर आज हताश।
सुन नारा वह कह रहा, नहीं बेचता काश ।।

रोजी रोटी खोजते, करत परिश्रम दास ।
अनपढ़ नेता कर रहा, मात्र हास उपहास।।
*नवीन कुमार तिवारी, अथर्व,,*

         

Share: