वियोग

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मिलना बिछड़ना कहिये, लिखी लेख क्या जाग।
कब होय मिलन सोचिये,अलाप करते राग ।।

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दूरियां दिल की बढते, मिलते जुलते जाग ।
वियोग बिछुड़न जब लगे, मन मसोसते भाग ।।
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वियोग दुर्योग जानते, दिल में लगते आग ।
वियोग सामने दिखते, झटपट सरपट भाग ।।
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बिछुड़न की पीड़ा रहे, रोते तब संसार।
जग विदाई मौत दिखे,जीवन मिलते सार ।।
*नवीन कुमार तिवारी*,,,

         

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