विरह पर उर्मिला

*विरह पर उर्मिला*

गुमसुम रहती उर्मिला ,, किसे मिला वनवास ।
वनवास में साथ चले , लखन भी साधु वास ।।

भाई भाभी के सहचर , वना गमन आतूर ।
नव यौवना कलप रही , चढ़ा कैसा फितूर ।।

उर्मिल भाव जो समझे, समझते विरह भाव ।
किसकी लेखनी लिखती ,लखन के मनोभाव ।।
नवीन कुमार तिवारी,,,

         

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