शूल लगे भूल

शूल लगे भूल
बोया पेड़ बबूल का , आम कहां से पाय।
पैरों में शूल चुभे ,सिर पकड़े अब रोय ।।

पुत्र मोह में दिन बितते, शिक्षा दीक्षा भूल ।
अनपढ़ को लोग ठगते,लगते रहते शूल ।।

कागज दिल से बातकर, कलम घिस तब पुकार।
कागजो में उकेरते , फिर जोर से हुँकार

उत्थान पर मेहनत हो ,करते क्या सरकार।
साहित्य राह दिखा चुकी ,पढ़ते लिखते यार।
नवीन कुमार तिवारी,,

         

Share: