समभाव

भेद भाव के कालिखे ,कितने गहरे पैठ ।
सम भाव कानून कहे, सत्य देखते ऐंठ ।।

समरसता कानून के, भाव समझो अनेक ।
तोड़ मोड़ भाव रचते, निष्कर्ष कहे नेक ।।

सम योगी देख करिये, कितने सुन्दर काज ।
अनुसरण पर जग लगते ,आये सबको लाज ।।

मय प्याला परोस रहे, सब क्रिकेट मैदान ।
नयन नीर सूखे दिखे , नकल चोर शैतान ।।
*नवीन कुमार तिवारी*

         

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