समानता

हकीकत सामने खड़ा, चुरा रहा है आँख।
जाती प्रमाण वो रखा ,चिल्ला चिल्ला के कांख ।।

जाती प्रथा मिटा रहा ,खुद रखे ये प्रमाण।
मुफ्त माल हजम कर रहे,कहते देश समान।।

राजनीतिक कठपुतली, सज गया वोट बैंक ,
जात पात कब बेचता,दिख गया ब्लेंक चेक ।।
नवीन कुमार तिवारी,,

         

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