सहसा, अचानक

आये सुनामी सहसा , लिलता कितने जान ।
प्रकृति का कोप सोचिये , प्रकृति सुधारो ज्ञान ।।

जल धारा क्यों भड़कते , तोड़ते नदी पाट ।
रेत खनन जहां करते ,डूबते बड़े घाट ।।

जनसँख्या विस्फोट पर , रहे सरकार मौन ।
गरीबी हटाते रहे , मुफ्तखोर अब कौन ।।

योग आसन सीख रहे , बनते विश्व गुरू ।
योग्य पर अयोग्य दिखला,भीख मांगना शुरू ।।

स्वास्थ्य शिक्षा बेचते , कैसा देश महान ।
सहसा गरीब बोलता , मेट्रो पर संज्ञान ।।
*नवीन कुमार तिवारी,,,*

         

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