हास्य योग रूदन

*योग पर,,,*

काया निरोग जतन पर, खर्च होते अपार ।
जो योग जतन समझते,जीवन सुख संसार ।।

योग कर सुयोग लगते, मिलती ख़ुशी अपार।।
योग धन योग समझिये,कलंक व्याधी हार ।।

तनाव दूर भगाइये , करते रहिये ध्यान ।
योगी आसन सीखते ,बढाते योग ज्ञान।।

अनुलोम से विलोम थे, करे साधना योग
राग द्वेष दूर करते,मुस्कान दिये लोग ।।

नैनो के योग करिये , आँखे होगी चार ।
दिन दुनिया से बेखबर ,मिलन को बेक़रार ।।

योग से सुयोग बनते,दिल देखते हार ।
मनमोहन कृष्ण बने, दुर्योग किये विचार ।।

योग दिवस शुभ कामना, सबको बांटो प्यार ।
काश्मीर हिम वादियाँ , सुन रूदन चित्कार ।
*नवीन कुमार तिवारी,,*

         

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