छिपता चंदा जाती रात

चाँद का चेहरा नदिया देखे
सोचे साजन हैं उस पार
साजन चंदा का चंचल मन
देखे नदिया का सिंगार
मोहित चाँद प्रिया नदिया पर
करता स्नेह चाँदनी वार
बरसाता मधुरस नदिया पर
नदिया करती प्रेम विहार
उजला रूप दमकता आँचल
नदिया नारी का आभास
मेघदूत ले जाता पाती
साजन आ जाओ इस बार
दूर गगन में चलता चंदा
नदिया से मिलने की आस
गाता माँझी गीत सलोने
छिपता चंदा जाती रात
भरतदीप

         

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