चलो मन

चलो मन उस वृंदावन गाँव ।
जहाँ बजाये श्याम बाँसुरी खड़ा कदम्ब की छाँव ।।
यत्न किये पर सुलझ न पाये जीवन के उलझाव ।।
वैरी सारे जग के बन्धन जिन से रहा जुड़ाव ।।
छोड़ो झंझट चल जमुना तट अब तो करो पड़ाव ।।
माया मोह रज्जु नित लिपटी करिये श्याम बचाव ।।
——————————–डॉ. रंजना वर्मामन

         

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