ले जा अपना ज्ञान पुराना

ले जा अपना ज्ञान पुराना ।
तेरे लाये अमृत – जल से हम को नहीं नहाना ।।
जा कर कहो कन्हैया से फिर धारे वो ही बाना ।
मोर मुकुट तिरछा पग नटखट वंशी मधुर बजाना ।।
यमुना की चाँदी सी सिकता पर आ रास रचाना ।
डाल गले में बांह कन्हैया हंसना और हंसाना ।।
चित पर चढ़ी मनोहर मूरत दिल में किये ठिकाना ।
ब्रह्म तत्व की टेर छोड़ कर गिरधर के संग आना ।।
मोहन से जा कर कह देना अब मत करें बहाना ।
चाह नहीं गोकुल की सखियाँ फिर से दर्शन पाना ।।
—————————–डॉ. रंजना वर्मा

         

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