तुम्हारे हाथों में नाव मेरी , इसे प्रभो ! भव से पार कर दो |

एक भक्ति गीत –
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तुम्हारे हाथों में नाव मेरी , इसे प्रभो ! भव से पार कर दो |
किया है जीवन तुम्हें समर्पित ,प्रभो ! दया की फुहार कर दो |
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कभी न मन में अधर्म पनपे ,कलुष किसी के लिए न जन्में |
न द्वेष कोई न क्रोध उपजे ,सदा रहें भाव ये हृदय में |
यही करो ईश अब जगत हित , हृदय के पावन विचार कर दो |
किया है जीवन तुम्हें समर्पित ,प्रभो ! दया की फुहार कर दो |
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बता रहा हूँ कभी न अब तक , न की है पूजा न प्रार्थना की |
न आरती की किसी की फिर भी , मिला हमेशा जो कामना की |
नहीं है मेरे ये ढोंग बस के , बचे खुचे दुख सँहार कर दो |
किया है जीवन तुम्हें समर्पित ,प्रभो ! दया की फुहार कर दो |
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मुझे ज़रूरत नहीं किसी की ,रहे तुम्ही बन सखा अभी तक |
वजूद मेरा रहेगा क़ायम , है कर तुम्हारा प्रभो ! तभी तक |
न दीन जग में बचे कहीं भी , कृपा सभी पर अपार कर दो |
किया है जीवन तुम्हें समर्पित ,प्रभो ! दया की फुहार कर दो |
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जो कर्म जैसा करे मनुज को , सुना यही है वही मिले फल |
करे अगर आज पुण्य तय है , मिलेगा निश्चित उसे वही कल |
न कर्म कोई हो नीच ऐसा , जुगाड़ परवरदिगार कर दो |
किया है जीवन तुम्हें समर्पित ,प्रभो ! दया की फुहार कर दो |
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तुम्हारे हाथों में नाव मेरी , इसे प्रभो ! भव से पार कर दो |
किया है जीवन तुम्हें समर्पित ,प्रभो ! दया की फुहार कर दो |
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गिरधारी सिंह गहलोत ‘तुरंत ‘ बीकानेरी |

         

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