थोड़ी राहत कर दो ना

हे महादेव ! कैलाशपति
एक विनती पूरी कर दो ना ।
गर्मी ज्यादा हो गई प्रभु ,
थोड़ी राहत कर दो ना ॥

माँ भारती के वीर पुत्र
वहाँ पापड़ सेंकें रेतों में ।
पशु – पक्षियों की दुर्गति भई
रूखे सूखे खेतों में ॥

हे महादेव ! हे पशुपति !
इनपे ये इनायत कर दो ना ।
गरमी ज्यादा हो गई प्रभु
थोड़ी राहत कर दो ना ॥

रचनाकार
गजेन्द्र मेहरा ‘साहिल’
गाडरवारा (म.प्र.)

         

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