पशुपति के ध्यान में

*भजन*
पशुपति के ध्यान में जिसने लगाई हो लगन।
क्यों न हो उसको शांति क्यों न हो उसका मन मगन।
काम ,क्रोध, लोभ, मोह शत्रु हैं सब महारथी।-2
इनके हनन के वास्ते क्यों न करे कोई यतन।
पशुपति के ध्यान में………..
ब्रह्मा,विष्णु,महेश, शक्ति सभी समाये एक रूप।-2
ऐसे प्रणव स्वरूप का क्यों न करे कोई मनन।
पशुपति के ध्यान में……..
चारों वेद,पुराण अष्टदश है सभी हर को प्रिय।-2
ऐसे परम पुराणों का क्यों न करे कोई पठन।
पशुपति के …………
गौरा अँग ,भूतादि संग, पी के भंग भोलेनाथ।-2
भस्म रमाये देह मेंकरें कैलाश पर रमण।
पशुपति के ध्यान………..
जटा गंग,भाल चंद्र ,हाथों में ड़मरू, त्रिशूल।-2
ऐसे परम प्रकाश को आओ करें सभी नमन।
पशुपति के ध्यान में जिसने लगाई हो लगन।
क्यों न हो उसको शांति क्यों न हो उसका मन मगन।
—–राजश्री—–

         

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