राधे-श्याम

माता जिसकी यशोदा रानी,
नटखट ऐसे बृजबिहारी ।

मुरली जिनकी पहचान बनी,
ऐसे छैला कृष्ण मुरारी ।

जिनके संग है प्रेम रचाये,
रास रचाए वृषभान कुमारी ।

तन निश्चल- मन प्रेम भरा ,
जग है जिनके मनुहारी ।

जो है जग के पार लगावत,
उंगली थामके नन्द -नन्दन,
क्रीड़ा करत घर-आंगन।

ऐसे है सतेन्द्र के साधक ,
भव- सागर से पार लगवात ,
प्रेम उपवन है वृंदावन ।

प्रेम परीक्षा दिन्ही राधा संग,
प्रीत की रीत चलाई राधा रानी ।

कभी गलिन में कभी कुंजो में,
कभी यमुना के तीर संग राधा,
है अलख जगायी प्रेम की।

ग्वाल- बाल है जिसके साक्षी,
रास- रचावत मन- अहलावत,
कृष्ण मुरारी राधा रानी।….…..

“””””””””””‘”””” सत्येन्द्र बिहारी”””””””””””””

         

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