विनती सुनो इक बार

हे प्रभु मोहि विनती सुनो इक बार,
ले विश्वास मैं दौड़ा आया
कब से खड़ा हूँ तेरो द्वार l
हे प्रभु मोहि…………..ll

ले लो शरण अपने रज बीच,
दे दो मोहि सुखधाम
जनम-जनम की बिगड़ी बना दो,
कर सुख-दुख एक समान l
हे प्रभु मोहि विनती सुनो इक बार ll
सारा जग मैं छोड़ के आया,
तन मन धन सब तुझ पे लगाया
ले कर तेरो नाम l
हे प्रभु मोहि विनती सुनो इक बार ll
युग-युग से मोरी अँखिया प्यासी,
अब तो दे दो दर्श अविनासी
न तो दर तेरे मैं त्यागूं प्राण l
हे प्रभु विनती सुनो इक बार ll

         

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