इताब-क्रोध

नीम हकीम परास्त हुए, सुन आगे इताब ।
क्रोधी और लड़ाकु का मिल जाता ख़िताब।
मन ही मन आक्रोश बढ़े,बढ़े संग उत्पात,
दिलों में कड़वाहट का मिले नहीं हिसाब।
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✍ नीलम शर्मा

         

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