ईश्वर का अवतार -माँ

मन्दिर मस्जिद गुरुद्वारे में जाने से क्या होता है
क्योकि माँ से बढ़के जग में कोई दर्श नही होता
मंजिल मिल न पाती है उपवन वीराने हो जाते
जब तक माँ के हाथों का सिर पर स्पर्श नही होता

चोट लगे गर मुझको कही तो दर्द उसे हो जाता है
मेरे बिना उसे दुनियाँ में कुछ न इक पल भाता है
पूरा दिन लल्ला लल्ला कह मुझपे प्यार लुटाती है
तब कहता हूँ माँ से प्यारा कोई न जग में नाता है

ऋषभ तोमर राधे

         

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