नुकीला

डाल-डाल पर कौवे बैठे,पात-पात पर कीडे हैं।
बगिया कैसे महकेगी अब,माली नशे में डूबे हैं।
भवरों की जामात खडी है,फूल का रस ले लेने को,
फूल बेचारा फसा हुआ है,काँटे बड़े नुकीले हैं।।

नाम-कृष्ण कान्त तिवारी “दरौनी”

         

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