भोगा हुआ यथार्थ

न लिखी पंक्तियों का शब्दार्थ है कविता
चाय के साथ लें न वह पदार्थ है कविता
छन के निकलता हमारे मन के कोने से
हमारा भोगा हुआ बस यथार्थ है कविता

         

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