माँ से प्यारा कोई नही

चोट लगे गर मुझको कही तो दर्द उसे हो जाता है
मेरे बिना उसे दुनियाँ में कुछ न इक पल भाता है
पूरा दिन लल्ला लल्ला कह मुझपे प्यार लुटाती है
तब कहता हूँ माँ से प्यारा कोई न जग में नाता है

फूल तुम्हे भेजा है खत में कई तर्ज पर मुक्तक

         

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