मेरे सिंद्धान्त मेरी सच्चाई

किरदार गुम हुए अब वस्त्र नाचते हैं हर ओर
भले सीरत हो कौए सी दिखते सभी सुंदर मोर

ईमानदार वह जो एकांत जंगल में भी ईमानदारी बरते
ना कि समाज के डर से शुद्ध वचन और आत्मा हो चोर
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युवराज अमित प्रताप 77

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