वंदना की वंदना

है सदियों से हाथों में चाँद मेरे
फिर भी धरती पर रहते पांव मेरे

है अब भी वंदना की वंदना यही
ना बनना कभी शहर तू , ओ गाँव मेरे

Vandna Singh Dhabhai
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