जरूरी तो नहीं

हजार कोशिशें की मैने ,
तुझको ही जिताने की ।
हो हरबार मेरी हार ,
जरुरी तो नही ॥

ताउम्र करता रहा ,
तेरी गलतियों को माफ ।
बख्शिस मिले हर बार ,
जरूरी तो नही ॥

हर मर्तबा चला यूं ,
अकेला ही राह पर ।
कोई साथ हो इस बार ,
जरूरी तो नही ॥

हर बार तोड़ दिया ,
दिल मेरा तुमने ।
टूटे दिल मेरा इसबार ,
जरूरी तो नही ॥

क्यों फेंक दिया तुमने ,
वो हाथ का लाकेट ।
”साहिल” चीज हो बेकार ,
जरूरी तो नही ॥

रचनाकार
गजेन्द्र मेहरा ‘साहिल’
गाडरवारा (म.प्र.)

         

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