बस अंत

बस अंत हुआ मानों सर्दी का, देखो बसंत नव आया है।
बस अंत हुआ मानों विरहा का, रंग प्रेम बसंती छाया है।
बस अंत हुआ छोटी रातों का,देखो दिनकर गहराया है।
बस अंत हुआ मानों आलस का, ऊर्जा प्रकाश लहराया है।
नीलम शर्मा ✍️

         

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