सिसकियाँ

तड़पनें दो दिलों की,सनम सिसकियां याद रखती हैं
मधुर प्रीतम की यादों को, हिचकियां याद रखती हैं ।
भले बीते अनगिनत साल ,तेरे दिदार को दिलबर,
तिरी मीठी छुअन को दिल की कलियाँ याद रखती हैं ।

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बागबान चाहिये और चमन चाहिये
मेरी चाहत को पूरा गगन चाहिये।
डूबा कबसे अंधेरे में दिल है मिरा
रौशनी के लिए नीलम सा मन चाहिये।

नीलम शर्मा

         

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