“पहचान लो तुम”…

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सुन , सूफ़ियाना है प्यार मेरा , जान लो तुम ,
तुम बिन अधूरा संसार मेरा , मान लो तुम ।
देखना मत मगर अपने दिल से पूछ लेना ,
क्या बोलता व्यवहार मेरा , पहचान लो तुम ।।
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अहसासों का कुछ भार मेरा , सम्हाल लो तुम ,
ज़ेहन में कुछ ऐतबार मेरा , डाल लो तुम ।
बेवज़ह की दूरियाँ , अब तकलीफ़ देती हैं ,
लंबा मत हो इंतज़ार मेरा , टाल लो तुम ।।
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मानो बस मनुहार मेरा , हाथ थाम लो तुम ,
मन जब बेक़रार मेरा , दिल से काम लो तुम ।
हार गया हूँ दिल की बाजी न जाने कबसे ?
स्वीकारा हार मेरा , वफ़ा का नाम लो तुम ।।

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मोहब्बत मानो सार मेरा , पुकार लो तुम ,
तुम पर अधिकार मेरा , ख़ुद पे उतार लो तुम ।
और वज़ह मत ढूँढ , “कृष्णा” को अपनाने की ,
ज़हां से अलग क़रार मेरा , स्वीकार लो तुम ।।
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— °•K.S. PATEL•°
( 22/03/2019 )

         

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