भावनायें…

कभी इठलाती है यारो कभी ये मुस्कुराती हैं।
कभी तारीक़ियों में आके ख़्वाबों को जगाती हैं।
महकं उठती है उस पल रात को तन्हाइयाँ मेरी ‌,
कि सीने में जो भीनी भावनाएँ गुनगुनाती हैं।
——राजश्री——

         

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