हमनजर

कभी रात के मसीहा कभी दिन के उजाले हो।
जाने किस तरह से मेरी दुनिया को संभाले हो।
तुम कुछ भी रहो जहाँ की खातिर मगर।
मेरे लिए तो तुम हमनजर दिलवाले हो।
ड़ाॅ मीनू पाण्डेय

         

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