हिदायत

मुक्तक।

हिदायत दी हमें उसने,दीवाना बन न जाऊँ मैं।
मुहब्बत की हवाओं का,तराना बन न जाऊँ मैं।
चली सदियों से रीति जो,उसी का हिस्सा बनकर यूँ,
पतंगा बन न जाऊँ मैं, शमा पर जल न जाऊँ मैं।।

कृष्ण कान्त तिवारी “दरौनी”

         

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