अंगारों का शोर

आज प्रेम ने मुझे ,यूँ दिया झकझोर ।
जैसे बरसे आँगना, हो अंगारों का शोर।
जाने किसका हो गया, मेरा नन्दकिशोर।
अब न दिखती रोशनी, बस है अंधियारे का जोर।
मीनू पाण्डेय

         

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