खुशियां रास नहीं आती

खुशियों को भी खुशियां मेरी ,रास नहीं आती।
गुजर जाती हैं गलियों से, पास नहीं आती।
जिस घड़ी का इं तजार करते हैं बरसों से,
सजती है कई महफ़िल,वो घड़ी खास नहीं आती।
Shobha kiran

         

Share: