तुम्हें भुला न सके

मेरी सांसों का सूरज दिल की पश्चिम ढल रहा है
न जाने किसकी खातिर ये फिर भी जल रहा है
तुम्हारे बिना खुशियाँ कहाँ से होगी मेरी हमगम
बस तन्हाइयों के संग हर रोज काम चल रहा है

*******

तुम्हारा नाम जब आये तो अश्को को पी लेते है
तुम्हारी यादों की सुई से जख्मों को सी लेते है
हमारा हाल भी उन वृक्षों की तरह ही है साथी
जो न बरसात हो तो ओस पाकर ही जी लेते है

******

ज़िन्दगी में तुम्हें जाँ बुला न सके
और जज्बात दिल के सुला न सका
बहुत कोशिस करी भूलने की मगर
चाहकर भी तुम्हें पर भूला न सका

ऋषभ तोमर राधे

         

Share: