राख़ होने दो

ज़ख्म दे कर दवा की बात न कर।
बेवफ़ा तू वफ़ा की बात न कर।।

राख़ होने दो आज मुझ को भी
तू अभी से हवा की बात न कर।।
©अंशु कुमारी

         

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