अमर कथा

इक अमर कथा बलिदानों कि
हम तुम से कहते हैं
कर याद जिसे नयन नीर बहते है
पावन सुखद समय सुहाया था
दिन वैसॉखी का आया था
मेला लगा था बागों मे
थे मस्त मगन हो नॉच रहे
अपने अपनो को खुशियॉ बॉट रहे
इक अमर कथा……
धरती ने अपनी काया पे
प्रेम प्रसून बिछाया था
ढोल मृदंगो की तालों ने
अदभुत जशन मनाया था
इक अमर कथा बलिदानो कि हम तुमसे कहते हैं
कर याद जिसे नयन नीर बहते हैं
पहुची खबर जब गोरों को
ले अपने निज सैनिक दल बल
कर मौत का तॉडव वह कायर
मानवता को शर्माया था हॉ
डायर ने गोली चलबाया था
इक अमर कथा………..कहते है
कर याद जिसे नयन नीर बहते हैं
पावन मेला श्मशान बना वह
खुनी होली नहाया था
कर याद अमर बलिदानों को
नयन नीर बहते है
मातृभुमि के वीर सपुत को
शत शत नमन हम करते है
फिर दमक उठी आजादी की चिंगारी
इन्कलाब के नारों पे
चलती थी लाठियॉ मातृभुमि के लालो पर
प्राण न्योछावर हँस हँस के कर गए वो
मातृभुमि जयकारों पर
इक अमर कथा बलिदानों कि हम तुम से कहते हैं
कर याद जिसे नयन नीर बहते है

         

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