आजादी के दीवानें

इन मतवालों की हिम्मत को , देश भूलाना पायेगा !
जब जब होगा जिक्र जंग का, याद वो लम्हा आयेगा !!
लहरायेगा जब भी तिरंगा, गीत यही बस गायेगें !
भगत सिंह. सुखदेव. गुरू की , यादों में मुस्करायेगें!!
उम्र नही थी प्यारी जिनको , थी प्यारी बस आजादी !
अंग्रेजों को दिख रही थी , इनके हाथों बरवादी !!
आज देश में वन्देमातरम, इंकलाब फिर गूंजेगा !
भगत सिंह, सुखदेव,गुरू का, नाम फजा में गूंजेगा !!
गाँधी की करतूतों से , ये वीर वक्त से हारे थे !
अंग्रेजी ताकत के जिन्होनें , पत्ते खुलकर फाडे थे!!
नमन हजारों इन वीरो को , गर्व से दिल ये कहता है!
“सागर” के दिल में भगत सिंह, सुखदेव, गुरू ही रहता है!!
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मूल गीतकार ….
डाँ. नरेश कुमार ” सागर “

         

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