आज़ादी के परवाने

भगत सिंह आजाद बोस आजादी के दीवाने थे
बिरले दिलवाले वो तो वतन हिंद के रखवाले थे

किए कुर्बान प्राण जब भारत से गयी ग़ुलामी है
ये धरा है जन्नत सी शहीदों ने दी जहाँ सलामी है

बाँटते मंदिर मस्जिद वो गद्दार मुल्क के होते हैं
देख दशा आज वतन की शहीद आसमान में रोते हैं

सरजमीं से दगा करे जो साँप आस्तीन के कहलाते
आज़ादी के परवाने जल कर रोशन मुल्क कर जाते

हिंदी हैं हम वतन हैं वही लोग कह सकते हैं
देशद्रोही जालिमों को जो कभी नही सह सकते हैं

Vandana Singh Dhabhai
………★ Co.Ryt ★………

         

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