खामोशी जब इंकलाब होगी

हर खामोशी जब इंकलाब बनेगी
और हर जुर्म का जवाब बनेगी
तब क्रांति का फिर से आगाज होगा
भ्रष्टाचार का बेहतर इलाज होगा
अगर कोई बच्चा भूखा सोएगा
फिर कोई भगत सिंह बनके
अपने खेतों में बन्दूकें बोएगा
और ये बन्दूक कलम का रूप होगी
जाड़े की ठण्ड में गरीब की धूप होगी
तीव्र शब्दों का इसका बारूद होगा
खतरे में गुलामी का वजूद होगा
मज़लूमो को पीड़ा से मुक्त कराएगी
शहीदों के शौर्य पर प्रश्न उठाते
हर सवाल से भी भिड़ जाएगी
दरिन्दगी, लाचारी में दबे हुए को
शेरे हिन्द, और बोस बनाएगी।
चलो उस कलम को फिर जगाए
उसे इंकलाब का गीत सुनाए।

         

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