प्रबल प्रहार करो

 

न कोई बादल ना कोई बदरा ,
नकोई काजल ना कोई कजरा l
अभी गर्म खून बह रहे है हमारे ,
न कोई बेनी ना कोई गजरा ll
बिजली चमके अग्नि बरसे ,
भयभीत कम्पित हो शत्रु हमसे l
हाथ खोलो हमारे निराशा तोड़ो ,
और कुछ आश नहीं है तुमसे ll
और बच्चे हम खो नहीं सकते है ,
किसी मैयत पर रो नहीं सकते है l
अपने पौरुष के शौर्य आजमाएं हम ,
चंद बयान दे कर सो नहीं सकते है ll
अगर उनके हाथ में कोई खंजर है ,
देखे शत्रु तलवारो के क्या मंजर है l
नदी के बाढ़ से वो डराते है हमको ,
मालूम हो सुनामी लिए हम समंदर है ll
अब सीधे सीने पर वॉर करो ,
दम्भ दमन कर शत्रु संहार करो l
बहुत हो चुकी मानमनौअल की बातें ,
अब तो तुम प्रबल प्रहार करो ll
लाभ हानि की चिंता तुम करना नहीं ,
तुझे मालूम है की तुझे है मरना नहीं l
जवानो के हौशले जबाब देंगे शत्रु का ,
तुम आदेश थमाते थमाते डरना नहीं ll
………………….BP………………………………

         

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