“फौजी”…

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हिंद की पुकार जब … कानों से सीने में उतर आता है ।
तब हर-एक फौजी रणभूमि पर बिंदास चला जाता है ।
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इसका सब अरमान मातृभूमि को होता है समर्पित ,
तन-मन-धन कुर्बान करके ये बेहद सक़ून पाता है ।
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दुश्मनों को मुँह-तोड़ ज़वाब देने में है पीछे नहीं ,
इनके पराक्रम से दुश्मन भी हमेशा घबराता है ।
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देश में कोई भी खतरा हो या प्राकृतिक आपदा ,
अपने कर्मों से हर चेहरे को मुस्कान दिलाता है ।
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सागर की गहराई हो या फिर आसमान की ऊँचाई ,
ये बेख़ौफ़ होकर अपनी जान की बाजी लगाता है ।
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अपनों से जुदाई का असहनीय ग़म तो ज़रूर होता ,
मगर इनके कारण हर अपना गर्व से सिर उठाता है ।
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रखता है वतन को महफ़ूज़ सदा अपना लहू बहाकर ,
तिरंगे की शान में ये ….. बुलंदी का बिगुल बजाता है ।
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देश कृतज्ञ है…इनके बलिदान की परंपरा देखकर ,
वतन के लिये फ़ख़्र से सीने में गोली भी खाता है ।
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समर्पण क्या होता है “कृष्णा” कोई फौजी से सीखे ,
फ़र्ज़ के लिए क़ुर्बान होने में … सिर नहीं छुपाता है ।
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