” वतन के लिए “

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” वतन के लिए ”
सिर अपना कटवा देंगे,
पर गाय नही हम कटने देंगे,
गर्मी जब तक लहू में है ,
हम गौ कसी नही होने देंगे।

नही सुधरे वो पत्थर वाज ,
उनकी ईंट से ईंट बजा देंगे,
कसम हमें है भारत माँ की,
उन्हें दुनियां से ही मिटा देंगें।

न जाने कितने लाल शहीद हुए,
अब माँ की गोद न उजड़ने देंगें,
देश के गद्दार सावधान हो जाएँ,
अब तुम्हे चैन से नही रहने देंगें।

बातें अमन की , काम गद्दारों का,
उनकी गर्दन की झटके से उड़ा देंगें,
गांधार,अफगान देश का हिस्सा था,
इसके और टुकड़े नही होने देंगें।

शान से लहराएगा अपना तिरंगा,
इसका मान कभी नही गिरने देंगे,
जो आँख दिखाये भारत माँ को ,
माँ कसम वो आँख नही हम रहने देंगें।

” नीरज सिंह “

         

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