वतन हमारी आबरू वतन हमारी शान है

वतन हमारी आबरू वतन हमारी शान है।
त्याग और तपभूमि ,भारत सीप समान है।
धन्य झांसी की तलवार दुश्मन झट शमशान है।
धन्य गुरु गोबिन्द थे, सर्वसव किया कुर्बान है।
इन्कलाब के नारों से गूँजा हुआ आसमान है।
आजादी के परवानों का हर गली निशान है।
आजादी में बहा लहू ,धरती दुल्हन समान है।
जो फंदा चूम फांसी चढ़े वो नौजवान महान है।
तत्प्र वतन पे मिटने को कैसा उगता यहाँ धान है।
देश खातिर तिरंगे में लिपट जाता जवान है।
नन्ही आँखों के सपनों ने भरी ऊँची उड़ान है।
इसरो ने मंगल पर पहुचाया मंगलयान है।
आस्तीन के सांपों से वसूलना अभी लगान है।
भारत विश्व गुरु बने यही बाकी अरमान है।
वतन हमारी आबरू वतन हमारी शान है।

         

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